How is religion taking place
धर्म, दर्शन और अध्यात्म - यह तीन शब्द हमें सुनने-पढ़ने को मिलते हैं। तीनों ही शब्दों का अर्थ अलग अलग है, लेकिन यहां बात सिर्फ धर्म की करते हैं कि आखिर धर्म की परिभाषा क्या है। क्योंकि सवाल भी यही है। हिन्दू सनातन सिद्धांत धारा में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में धर्म का प्रमुख स्थान है। धर्मयुद्ध का अर्थ किसी संप्रदाय विशेष के लिए युद्ध नहीं। सत्य और न्याय के लिए युद्ध।
धर्म को अंग्रेजी में रिलिजन (religion) और ऊर्दू में मजहब कहते हैं, लेकिन यह उसी तरह सही नहीं है जिस तरह की दर्शन को फिलॉसफी (philosophy) कहा जाता है। दर्शन का अर्थ देखने से बढ़कर है। उसी तरह धर्म को समानार्थी रूप में रिलिजन या मजहब कहना हमारी मजबूरी है। मजहब का अर्थ संप्रदाय होता है। उसी तरह रिलिजन का समानार्थी रूप विश्वास, आस्था या मत हो सकता है, लेकिन धर्म नहीं। हालांकि मत का अर्थ होता है विशिष्ट विचार। कुछ लोग इसे संप्रदाय या पंथ मानने लगे हैं, जबकि मत का अर्थ होता है आपका किसी विषय पर विचार।हमारे धर्म को कई भागों में बांट दिया गया है हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आदि पर सोचने वाली बात है कि सभी में रक्त तो एक जैसा ही है फिर यह अलग-अलग धर्म क्यों?
कलयुग में संत रामपाल जी महाराज ही ऐसे धर्म का उत्थान कर रहे हैं जिसमें कि सभी धर्म एक है और संत रामपाल जी महाराज कहते हैं___
जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा ।
हिंदू मुस्लिम सिख इसाई धर्म नहीं कोई न्यारा।
संत रामपाल जी महाराज एक स्वच्छ भारत का निर्माण कर रहे हैं और भारत को सोने की चिड़िया फिर से बनाएंगे



Comments
Post a Comment
If you have any doubt please let me know.